उम्मीद

उम्मीद

उन उम्मीदों में खड़ा उतारना इतना आसान नहीं होता……
मगर मुश्किल भी नहीं है…..
थोड़ा सी मनमर्जी ओर…..
थोड़ा सा हौसला बढ़ाओ….
हो जाएगा बुलंद तेरा किरदार…
फिर मुठ्ठी में होगी तेरी हर ख्वाइश पूरी करने की कोशिश…
आंखो में होगी चमक, चाल में होगा एक जुस्सा, स्वाभिमान से भरा तेरा मस्तक…
पहेचान होगी तेरी….

किसने रोका है

जा…. भर ले उड़ान
किसने रोका है तुम्हे….
तेरी खोज ही तेरा जनुन होगा
किसने रोका है तुम्हे…..
तेरा विश्वास ही तेरा उत्साह है
किसने रोका है तुम्हे….
हाथ फैला के समेट ले आकाश
किसने रोका है तुम्हे….
रास्ता तेरे सामने है चल पड
किसने रोका है तुम्हे….
तेरे मन की हर ख्वाइश पूरी कर
किसने रोका है तुम्हे….
तेरे में पड़ी अच्छी सोच बता दें सबको
किसने रोका है तुम्हे….
तेरे में रही अच्छी इंसानियत दिखा दे
किसने रोका है तुम्हे….
बस….एक बार कर ले हिम्मत …निकाल अपने डर को बाहर…. फिर देख कैसे
छलांग लगाता अपनी मन की….

सही समय…

हमको दुनियावालों ने बहोत कुछ सिखाया….इसीलिए तो आज ये मोड़ पे खड़े है…. वरना कुए के मेंढ़क ही बने रहेते….लेकिन सिखने के लिए सही समय की परख भी आनी चाहिए…..

दोस्ताना

मेरे हाल पे हसने वाले मेरे यार
हस ले जितना हसना है कल किसने
देखी है तु कहा में कहा….
हम जो एकदुसरे पर ये हसते है वो
याराना एक हसीन याद बनके रहेने वाला है…..ये मजाक…ये मस्ती….ये दोस्ताना
पता नहीं फिर कब मिलेंगे ….
इसीलिए मेरे हाल पे हसने वाले हस ले
जी भर के ….

वक़्त

तुम्हे पता भी नहीं चलेगा कि क्या क्या गवा दिया है तुमने…..
और वक़्त ऐसे ही चला जाएगा….
थोड़ा संभल जा, थोड़ा रुक जा ओर देख कितनी जल्दी बदल रही है दुनिया
तु भी चल उठ….हो जा सबके साथ समय तेरा भी साथ देगा, राह भी दिखायेगा मगर सही राह चुनके चलना तो तुझे पड़ेगा….तभी तो मंजिल मिलेगी
तेरी ख्वाइश पूरी होगी….

डर

चट्टानो से टकराने वाला एसी छोटी सी इम्तहान से कब से डर ने लगा ?????

जब से पता चला कि डर नाम की भी चीज है ये दुनिया में तब से…..

ढाल

तुमने देखा नहीं तुम्हारे लिए जीने की चाहत को….
मेरे में बसती है तुम्हारी जान फिर कैसे परवाह ना करू….
दुनिया चाहे इधर की उधर हो जाए
में हमेशा तुम्हारी ढाल बनूंगी ….
तु बढ़ आगे, हौसला कर बुलंद
फतेह तेरी ही होगी….

परवाह

कितनी बार कहा है तुमसे की
मुझे तेरी परवाह है मगर हर बार
दिखाना जरूरी नहीं होता
महेसूस होता है अपने आप ….
अगर संवेदनाओं को जगाओ तो
बार बार कहेना पड़े वो प्यार नहीं
समझोता होता है जिंदगी से…..

चहेरा

रोज बहोत से चहेरे देखने को मिलता है
जैसे चहेरो के जंगल से गुजर रही हूं….
कभी कभी कोई चहेरा पढ़ने का अवसर मिल जाता है दिमाग सोचने लगता है…
कोई मासूम सा, कोई उदास, कोई गुस्से वाला, कोई हसता हुआ, कोई शांत….
जैसे चहेरो के जंगल मे एक खोज जो हमें अंदाजा नहीं आने देता कि कोन कैसा है……

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