शुक्रिया

तय न कर सके कैसे अदा करे शुक्रिया आपका
लाजवाब कविता के बहाने लब्ज को मशहूर कर दिया
कलम क्या पकड़ी उंगलियां सरकने लगी और पन्ने सजने लगे
दिल के भीतर मचा तहलका उभर कर अलंकृत रूप धारण करने लगा
आज मौन को वाचा मिली

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